जानिए भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर में पाकिस्तान के किन नौ आतंकी ठिकानो पर हमला किया था | Know 9 Terror Camp destroyed in Operation Sindoor

22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी आतंकी ने कश्मीर के पहलगाव के बैसरन में पर्यटकों को धर्म पूछ कर हत्या कर दिया था। 

और भारत सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम से ऑपरेशन चला कर पाकिस्तान स्थित नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन नौ ठिकानो का भारत में होने वाले आतंकी हमलों से पुराना रिश्ता रहा है। 

इन आतंकी ठिकानो में बहावलपुर जैश ए मोहम्मद और और मुरीदके लश्करे तैयबा का मुख्यालय है।

साथ ही पीओके में जिन भारतीय सेना ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनका उपयोग जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ के लिए किया जाता है। 

भारतीय सेना ने रॉ की जानकारी के आधार पर इन आतंकी ठिकानो की पहचान की और बाद में भारतीय सेना इन नौ आतंकी ठिकानो को नष्ट कर दिया।

जानिए पाकिस्तान स्थित कौन से नौ आतंकी ठिकाने थे ?

मरकज सुभान, बहावलपुर

मरकज सुभान पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब में स्थित बहावलपुर में जैश ए मोहम्मद का मुख्यालय है।  जैश ए मोहमम्द का सरगना मसूद अजहर ने यहीं से 2001 में 2001 में भारतीय संसद की योजना बनाई थी। 

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 2019 में पुलवामा हमले की योजना भी जैश के इसी मुख्यालय में बनाया गया था, जिसमें सीआरपीएफ के 44 जवान बलिदान हुए थे। 

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कई आत्मघाती हमलों में जैश और उसके सरगना मसूद अजहर की भूमिका के सबूत हैं।

मरकज तैबा, मुरीदके

लाहौर से 40 किलोमीटर दूर मुरीदके लश्करे तैयबा का मुख्यालय है और यहीं आतंकियों की ट्रेनिंग ग्राउंड भी है। लश्करे तैयबा का प्रमुख आतंकी हाफिज सईद यही रहता है। 

अमेरिका में गिरफ्तार दाउद गिलानी उर्फ डेविड कोलमैन हेडली और एनआइए की कस्टडी में तहव्वुर हुसैन राणा के अनुसार 2008 में मुंबई में आतंकी हमले की योजना यहीं बनाई गई थी और आतंकियों को ट्रेनिंग भी यहीं दी गई थी।

एकमात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी कसाब ने भी यहीं ट्रेनिंग लेने की बात स्वीकार की थी। यही नहीं, हमले के दौरान यही से हमला करने वाले आतंकियों को निर्देश दिये जा रहे थे। 

इसके अलावा भारत में हुए कई आतंकी हमलों की योजना भी यही बनने के सबूत हैं।

सरजल कैंप, सियालकोट

जम्मू से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार सियालकोट में स्थित सरजल कैंप आतंकियों की ट्रे¨नग और घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। 

खासकर जम्मू इलाके में आतंकी घटनाओं में इस कैंप से जुड़े आतंकियों के हाथ होने के सबूत मिले हैं। इसी कैंप से आए आतंकियों ने इसी साल मार्च में जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

महमूना जोया कैंप, सियालकोट

सियालकोट के पास स्थित महमूना कैंप का इस्तेमाल मुख्य रूप से हिजबुल मुजाहिदीन द्वारा किया जाता है। कमजोर हो चुके हिजबुल का कश्मीर में लोकल नेटवर्क आज भी सबसे मजबूत है, जिसका इस्तेमाल दूसरे आतंकी संगठन भी करते हैं। 

माना जा रहा है कि पहलगाम हमला करने वाले आतंकियों को भी लोकल सपोर्ट यही से उपलब्ध कराया गया था।

पीओके स्थित टारगेट:

सवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद

इस कैंप का इस्तेमाल लश्करे तैयबा के आतंकियों के ट्रेनिंग और कश्मीर में हमले के लिए किया जाता है। 2024 में गुलमर्ग और सोनमर्ग में आतंकी हमलों के साथ-साथ पहलगाम में आतंकी हमला करने वाले आतंकी भी इसी कैंप से जुड़े हैं।

स्येदना बेलाल कैंप, मुजफ्फराबाद

यह कैंप जैश ए मोहम्मद से जुड़ा है और इसका इस्तेमाल आतंकियों की ट्रे¨नग और भारत में हमले के लके लिए किया जाता है। यहां हथियार चलाने के साथ-साथ जंगल में लंबे समय तक ¨जदा रहने और आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग की जाती है।

गुलपुर कैंप, कोटली

जम्मू-कश्मीर के रजौरी-पूंछ में आतंकी हमलों के लिए इस कैंप का इस्तेमाल किया जाता है। यह लश्करे तैयबा से जुड़ा है। पिछले साल बस पर हमला कर तीर्थ यात्रियों की हत्या करने वाले आतंकी इसी कैंप से जुड़े थे।

अब्बास कैंप, कोटली

रजौरी के सामने एलओसी के पास स्थित इस कैंप में फिदाइन आतंकी तैयार किये जाते थे। लश्करे तैयबा से जुड़े इस कैंप में एक समय में 50 आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है।

बरनाला कैंप, भीमबर

यहां आतंकियों को हथियार चलाने के साथ-साथ आइईडी बम बनाने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें जंगल में लंबे समय छुपे रहने की भी ट्रेनिंग दी जाती है।

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